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October 15, 2026

उत्तराखंड के खूबसूरत ताराकुंड झील और मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण, जानिए क्या है मान्यता

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उत्तराखंड के पौड़ी जिले में खूबसूरत और प्राकृतिक नजारों के बीच बसा है ताराकुंड, अब बनेगा आस्था और पर्यटन का नया केंद्र, जानिए इसकी महिमा

देहरादून: उत्तराखंड में हर कोने-कोने में भगवान और कुछ आलौकिक शक्तियों की मौजूदगी माना जाता है. जिसे वजह से उत्तराखंड को देवभूमि का दर्जा मिला है. यहां हर जगह मंदिर मिल जाते हैं. जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं हैं. ऐसी ही कुछ मान्यताओं को समेटा हुआ एक मंदिर पौड़ी में भी मौजूद है. जिसे ताराकुंड महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर एक कुंड यानी झील के किनारे स्थित है. इस कुंड और मंदिर को लेकर भी अपनी मान्यताएं हैं. वहीं, अब ताराकुंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है.

दरअसल, पौड़ी के इस पौराणिक स्थल को धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है. जिसके तहत खुद धामी सरकार के मंत्री धन सिंह रावत और सैकड़ों ग्रामीणों ने पदयात्रा कर ताराकुंड पहुंचे. जहां उन्होंने न केवल पूजा-अर्चना की. बल्कि, इस दौरान उन्होंने मां तारा का भव्य मंदिर निर्माण, झील का सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को विकसित करने की बात कही. मंत्री धन सिंह ने भरोसा दिलाया कि इस पौराणिक स्थल को विकसित करने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी.

2200 मीटर की ऊंचाई पर बसा है ताराकुंड झील और प्राचीन मंदिर: उत्तराखंड के पौड़ी जिले में समुद्र तल से करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर ताराकुंड नाम का एक खूबसूरत और शांत प्राकृतिक झील है. जहां प्राकृतिक रूप से बनी एक खूबसूरत ताल यानी कुंड या झील है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है. ऊंचे पहाड़, हरियाली और जंगलों के बीच मौजूद छोटी झील और प्राचीन मंदिर इस स्थान की पहचान है.

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