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August 27, 2026

नेपाल त्रासदी में कोलकाता के 32 लोगों का ग्रुप लापता, अभी तक कोई सुराग नहीं, तलाश जारी

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नेपाल में आई बाढ़ से लगातार मृतकों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. अभी तक करीब 160 लोगों की मौत की सूचना है.

कोलकाता: नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. बता दें, नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक से जल का तेज प्रवाह आया और देखते-देखते सब कुछ तबाह हो गया है. अभी तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस त्रासदी में करीब 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. वहीं, तकरीबन 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक सरकार ने रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों को तेज कर दिया है. खतरे में घिरे लोगों की मदद के लिए नेपाली सेना ने प्रभावित इलाकों में खाने-पीने की जरूरी चीजे, टेंट और दवाइयाँ जैसी राहत सामग्री पहुंचा दी है. तिमुरे, स्याब्रूबेसी और नदी के किनारे वाले इलाकों में नेपाली सेना और प्राइवेट सेक्टर के हेलिकॉप्टरों के साथ-साथ पैदल टीमें भी तैनात की गई हैं. सरकार ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है.

नेपाल में त्रासदी में पश्चिम बंगाल से गए कुछ लोगों में कोलकाता का एक 32 लोगों का एक ग्रुप भी शामिल है, जिनका अभी तक तक कोई सुराग नहीं मिला है. इस बात की पुष्टि एक अधिकारी ने की है. उन्होंने बताया कि 30 पर्यटकों और दो टूर मैनेजरों का यह समूह 21 अगस्त को शहर से निकला और अगले दिन नेपाल पहुंचा था. यह ग्रुप तिब्बत में दाखिल होने के लिए सुबह रसुवागढ़ी पहुंचा. उन्होंने बताया कि जब नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास वाले इलाके में अचानक बाढ़ आई, तो ग्रुप के सदस्य सुबह करीब 8.30 बजे इमिग्रेशन ऑफिस में थे.

इस अधिकारी ने बताया कि जब से इलाके में अचानक बाढ़ आई है, तब से 32 सदस्यों में से किसी से भी कोई संपर्क नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि हम पश्चिम बंगाल के उन सभी लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जो प्रभावित इलाकों में हो सकते हैं. जमीनी हालात बहुत मुश्किल हैं और बातचीत का संपर्क टूट गया है.

बता दें, तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, कई अहम पुल बहा दिए और एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को ठप कर दिया. इस घटना में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई और 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अचानक आई बाढ़ में लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया.

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि जान-माल के इस दुखद नुकसान से मुझे गहरा दुख हुआ है. जिन लोगों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और अपनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. मैं नेपाल और प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं. अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और राज्य के प्रभावित पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, कामगारों और व्यापारियों की मदद के लिए काठमांडू में भारतीय दूतावास और नेपाली अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रही है.

कोलकाता का यह ग्रुप शहर की एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए यात्रा कर रहा था.एजेंसी ने बताया कि उसने नेपाल टूरिज़् अधिकारियों और भारतीय दूतावास से संपर्क किया था, लेकिन लापता लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. काठमांडू की सम्राट ट्रैवल एजेंसी ने इस टूर का आयोजन किया था. उनके पास अपना हेलीकॉप्टर है. कोलकाता की ट्रैवल एजेंसी के प्रतिनिधि दिब्य ज्योति बसु ने कहा कि ये सभी पर्यटक कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए थे. हमारे दो मैनेजर, जयंत सान्याल और नृपेन सरकार भी इन 30 पर्यटकों के साथ हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों मैनेजरों के पास मोबाइल रोमिंग की सुविधा थी और उनसे आखिरी बार सुबह करीब 8 बजे संपर्क हुआ था. बताया जा रहा है कि उस समय कुछ पर्यटक फेसबुक पर लाइव भी हुए थे. लेकिन अचानक आई बाढ़ की खबर के बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी ने प्रभावित इलाके में एक हेलीकॉप्टर भेजा है. राज्य सरकार के अधिकारी ने बताया कि कोलकाता के अलावा, हुगली के चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के रहने वाले लोग भी नेपाल में फंसे या लापता लोगों में शामिल हो सकते हैं.

अचानक आई बाढ़ ने प्रभावित इलाकों में संचार और आवागमन को बुरी तरह बाधित कर दिया है, जिससे अधिकारियों के लिए आपदा में फंसे लोगों का पता लगाना मुश्किल हो गया है. पश्चिम बंगाल सरकार ने भवानी भवन स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में हेल्पलाइन शुरू की हैं, ताकि उन परिवारों की मदद की जा सके जो नेपाल में प्रभावित हुए हो सकने वाले अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी चाहते हैं.

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि सुबह 8:37 बजे (स्थानीय समय) तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ (flash floods) की खबर मिली. इससे संकेत मिलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से ग्लेशियर फटा होगा, जिससे यह आपदा आई.

महाराष्ट्र में भी हेल्पलाइन शुरू
वहीं, नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए हेल्पलाइन और 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम शुरू कर दिया गया है. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए, राज्य सरकार ने वहां फंसे महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. नागरिकों को तुरंत मदद पहुंचाने और फंसे हुए लोगों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए मंत्रालय (राज्य सचिवालय) में 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम बनाया गया है. इसके अलावा, फंसे हुए नागरिकों की जानकारी ऑनलाइन रजिस्टर करने के लिए एक खास लिंक भी उपलब्ध कराया गया है. नेपाल में फंसे नागरिकों के परिवारों और रिश्तेदारों से अपील की जाती है कि वे संबंधित लोगों के बारे में प्रशासन को जानकारी दें. इसके लिए एक ऑनलाइन सुविधा दी गई है.

यहां पर करें रजिस्ट्रेशन
रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक: https://geospatial.mahaseoc.in/Sahayata_gulf/। जानकारी भरते समय, कृपया फंसे हुए व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, नेपाल में मौजूदा जगह या होटल, यात्रा की जानकारी और परिवार का संपर्क नंबर (अगर उपलब्ध हो) दें. प्रशासन को जितनी सही जानकारी मिलेगी, राहत और खोज अभियान उतनी ही तेजी से चलाए जा सकेंगे. नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के नागरिक जिन्हें मदद की जरूरत है, या उनके परिवार के सदस्य जो उनके बारे में जानकारी चाहते हैं, वे नीचे दिए गए नंबरों पर अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. राज्य कंट्रोल रूम हेल्पलाइन: 1070 (टोल-फ्री) | कंट्रोल रूम: +91-9321587143. आधिकारिक ई-मेल: controlroom@maharashtra.gov.in. अगर नागरिक नेपाल में मौजूद अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत प्रशासन से संपर्क करना चाहिए. संबंधित व्यक्ति की जानकारी ऑनलाइन लिंक के जरिए दी जानी चाहिए. कंट्रोल रूम हेल्पलाइन के ज़रिए भी जानकारी दी जा सकती है.

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