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September 26, 2026

बनबसा में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई, हाईकोर्ट ने यूपी सिंचाई विभाग को दिए ये आदेश

नैनीताल हाईकोर्ट ने यूपी सिंचाई विभाग के सचिव को निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमणकारियों के मामलों को दोबारा से सुनें, रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चंपावत के बनबसा में वन विभाग की भूमि पर हुए अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के सचिव को निर्देश दिए हैं कि जिन लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है, उनके मामलों को दोबारा से सुनें और उसकी रिपोर्ट न्यायालय में छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें. मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने छह सप्ताह बाद की तिथि नियत की है.

हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों के कागज चेक कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था: पूर्व में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग को निर्देश देकर कहा था कि जो भी अतिक्रमणकारी हैं, उन्हें नोटिस देकर उनके दस्तावेजों की जांच करें. तदनुसार उनको हटाने की कार्रवाई प्रारम्भ करें. कोर्ट के आदेश पर विभाग ने इसकी जन सुनवाई करने के लिए एक सावर्जनिक नोटिस जारी कर अतिक्रमणकारियों से मय दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा था.

488 अतिक्रमणकारी चिन्हित हुए थे: 488 चिन्हित अतिक्रमणकारियों में से 314 लोग ही अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सके. जांच करने पर 314 अतिक्रमणकारियों में से 174 के दस्तावेज अवैध पाए गए. अवैध पाए गए अतिक्रमणकारियों को जगह खाली करने का नोटिस दिया गया.

हाईकोर्ट ने दस्तावेजों का पूनर्मूल्यांकन करने को कहा: पेश की गई रिपोर्ट पर कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों के दस्तावेजों का पुनः मूल्यांकन करने को कहा है. दस्तावेज पेश न करने पर उनके खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई करने को कहा है. साथ में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसमें यूपी सरकार जो भी मदद मांगे, वह उत्तराखंड सरकार उसे मुहैया कराए.

बहादुर सिंह पाटनी ने दायर की है जनहित याचिका: मामले के अनुसार चंपावत निवासी बहादुर सिंह पाटनी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि जिला चंपावत के बनबसा क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है. इसकी वजह से बाजार और आने जाने वाले लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यही नहीं कई बार जाम लगने के कारण लोग अपने गंतव्य स्थान पर तय समय में नहीं पहुंच पा रहे हैं. लिहाजा वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाया जाए.

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