Categories

August 4, 2026

अवस्थापना सुविधाओं के लिए उत्तराखंड की झोली में गिरेंगे 24 हजार करोड़, बुनियादी सुविधाओं का होगा विस्तार

1 min read

उत्तराखंड में अवस्थापना विकास, पर्यटन-तीर्थाटन, बुनियादी सुविधाओं को दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की उम्मीदों को डबल इंजन से तेज गति मिलने जा रही है।

16वें वित्त आयोग की संस्तुति के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 17,414.57 करोड़ रुपये राज्य की झोली में गिरेंगे। पूंजीगत निवेश योजना, जल जीवन मिशन की लंबित परियोजना धनराशि के साथ ही केंद्रीय योजनाओं को मिले प्रोत्साहन को सम्मिलित किया जाए तो राज्य को लगभग 24 हजार करोड़ की प्राप्ति होगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में नए वित्तीय वर्ष में नौ हजार करोड़ से अधिक राशि अतिरिक्त मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इस सबके बीच राज्य को झटका भी लगा है। 16वें वित्त आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान की राह रोक दी है। शहरी-ग्रामीण निकायों को 3160 करोड़ अधिक मिलेंगे
उत्तराखंड के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट नई उमंग जगाने वाला है। केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की संस्तुतियों को भी स्वीकृति दी है।

इन संस्तुतियों के आधार पर नए वित्तीय वर्ष में राज्य को केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में वर्ष 2025-26 की तुलना में 1841.16 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे आयोग ने अगले पांच वर्षों के लिए शहरी और ग्रामीण निकायों के लिए अनुदान राशि में बड़ी वृद्धि की है।

15वें वित्त आयोग की तुलना में 3160 करोड़ रुपये इन निकायों को अधिक मिलेंगे। प्रतिवर्ष करीब 620 करोड़ रुपये की यह अधिक राशि शहरी निकायों और पंचायतों को संसाधन जुटाने में सहायक होगी।

राजस्व घाटा अनुदान के 28,147 करोड़ से राज्य वंचित
इसी प्रकार आपदा प्रबंधन मद में पांच वर्षों में 5504 करोड़ रुपये देने की संस्तुति आयोग ने की है। इनमें केंद्रांश 4953.60 करोड़ है। इस तरह प्रति वर्ष केंद्र से 990 करोड़ राज्य को मिलने हैं। आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान देने से राज्यों को मना किया है। इससे राज्य को बड़ा नुकसान तय है। 15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2021-26 की अवधि में राज्य को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 28,147 करोड़ की राशि दी।

अब यह बड़ी राशि राज्य को नहीं मिल पाएगी। आपदा प्रबंधन की राशि में भी पिछली बार की तुलना में 4.33 प्रतिशत की कमी की गई है।

ब्याजमुक्त ऋण के रूप में मिलेंगे 2000 करोड़ रुपये
वहीं, केंद्रीय बजट में ब्याजमुक्त ऋण के रूप में राज्यों को दी जाने वाली धनराशि में वृद्धि राज्य को बड़ी राहत मिलेगी। स्कीम फार स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फार कैपिटल इन्वेस्टमेंट के रूप में राज्य को लगभग 2000 करोड़ की राशि मिल सकेगी।

जल जीवन मिशन योजना को केंद्रीय बजट में वर्ष 2028 तक विस्तारित तो किया गया है ही, साथ में इस योजना में 67,670 करोड़ रुपये बजट प्रविधान किया गया है। परियोजना अवधि बढ़ने से राज्य को इसके अंतर्गत 3500 करोड़ की लंबित राशि मिलने की उम्मीद बंधी है।

You may have missed