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October 9, 2026

कॉर्बेट से लगे कोटद्वार की धरती पर कभी गुर्राता था गैंडा, 200 साल पुराना इतिहास आया सामने, रजा काजमी ने खोला राज

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प्रसिद्ध लेखक और वन्यजीव विशेषज्ञ रजा काजमी ने कहा कि उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र में गैंडों की मौजूद थी.

रामनगर (उत्तराखंड): आज जब भारत में गैंडों का नाम लिया जाता है तो आमतौर पर असम, उत्तर बंगाल, नेपाल और दुधवा जैसे क्षेत्रों की तस्वीर सामने आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी उत्तराखंड की तराई भी गैंडों की मौजूदगी की गवाह रही है? कॉर्बेट पार्क पहुंचे प्रसिद्ध लेखक, स्पीकर और वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ रजा काजमी ने गैंडों के इतिहास से जुड़ी ऐसी ही बेहद रोचक जानकारी साझा की. जिसने उत्तराखंड के वन्यजीव इतिहास को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.

रजा काजमी ने बताया कि आज गैंडों को मुख्य रूप से असम, नेपाल और नॉर्थ बंगाल से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन इतिहास के पन्नों में उत्तराखंड में भी गैंडों की मौजूदगी के प्रमाण मिलते हैं. उन्होंने बताया कि भारत में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए गैंडे के शुरुआती चित्रों में से एक उत्तराखंड में ही तैयार किया गया था.
रजा काजमी के मुताबिक करीब 200 साल पहले अंग्रेज चित्रकार थॉमस डेनियल और उनके भतीजे विलियम डेनियल भारत भ्रमण पर निकले थे, दोनों कलाकार भारत के अलग-अलग हिस्सों के भूगोल, प्रकृति और वन्यजीवों के चित्र तैयार कर रहे थे.

इसी दौरान वे कोटद्वार क्षेत्र पहुंचे, यहां उन्होंने एक नदी के किनारे गैंडे को पानी पीते हुए देखा. बताया जाता है कि दोनों चित्रकार गैंडे को देखने के लिए उसके काफी करीब पहुंचे और उसका स्केच तैयार किया, बाद में इसी स्केच के आधार पर गैंडे की पेंटिंग बनाई गई. रजा काजमी के अनुसार, उस समय गैंडे को वहां से भगाने के लिए गोली भी चलाई गई थी. उन्होंने बताया कि यह घटना इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि उत्तराखंड की तराई में कभी गैंडों की मौजूदगी थी.

इतना ही नहीं गैंडों के ऐतिहासिक विस्तार की बात करें तो पश्चिम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर क्षेत्र की तराई तक और उससे भी पहले मुगलकालीन दस्तावेजों में पेशावर तक गैंडों के पाए जाने का उल्लेख मिलता है. आज गैंडों का प्राकृतिक क्षेत्र काफी सीमित हो चुका है, भारत में मुख्य रूप से असम, उत्तर बंगाल और उत्तर प्रदेश के दुधवा तथा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में गैंडे पाए जाते हैं. ऐसे में उत्तराखंड में गैंडों की ऐतिहासिक मौजूदगी से जुड़ी यह जानकारी कॉर्बेट और इसके आसपास की जैव विविधता और वन्यजीव इतिहास की एक बेहद दिलचस्प और अनसुनी कहानी सामने लाती है.

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