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October 13, 2026

कौन हैं ढाल सिंह बिसेन, जो बने उत्तराखंड के राज्यपाल, जानें मध्य प्रदेश से कनेक्शन

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सिवनी से दूसरे नेता ढाल सिंह बिसेन को मिला महामहिम की कुर्सी तक पहुंचने का मौका, जानिए विधायक से राज्यपाल की कुर्सी तक पहुंचने का सफर. महेंद्र राय की रिपोर्ट.

छिन्दवाड़ा/सिवनी : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट से भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है. डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन कौन हैं, मध्य प्रदेश से उनका क्या कनेक्शन है और भारतीय जनता पार्टी में उनका सफर कैसा रहा और वे कैसे पहुंचे महामहिम की कुर्सी तक, जानिए इस आर्टिकल में.

मध्य प्रदेश के सिवनी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 14 मई 1952 को सिवनी जिले के बरघाट विधानसभा पिपरिया में हुआ. डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश की विधानसभा में पहली बार वर्ष 1990 में विधायक चुने गए. इसके बाद 1993, 1998 और 2003 में सिवनी की बरघाट विधानसभा से चुनाव जीते. साल 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे, जिसमें वन, परिवहन, स्कूल-शिक्षा, खनिज, जेल विभाग की जिम्मेदारी निभाई. ढाल सिंह बिसेन साल 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे.”

2019 में बालाघाट लोकसभा सीट से चुनकर दिल्ली पहुंचे

2019 के आम चुनाव में बालाघाट लोकसभा से उन्हें चुनाव मैदान में उतर गया, जहां से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचे. बालाघाट लोकसभा में कुछ हिस्सा सिवनी जिले का भी आता है, जिसमें बरघाट विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर एक बार विधायक के रूप में भी सेवा कर चुके थे, इसका उन्हें लाभ मिला था. हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में उनका टिकट कट गया था.

ढाल सिंह बिसेन का बालाघाट में वर्चस्व

डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन अन्य पिछड़ा वर्ग की पवार जाति से आते हैं. बालाघाट जिले में पवार समाज सबसे अधिक है, जिसकी वजह से चाहे भारतीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस पार्टी ज्यादातर पवार समाज के लोगों को ही लोकसभा का टिकट देती है. बालाघाट लोकसभा से इसके पहले बोध सिंह भगत फिर खुद ढाल सिंह बिसेन और अब भारती पारधी सांसद हैं, ये सभी पवार जाति के हैं. इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर बिसेन भी बालाघाट से ही चुनकर आते थे. ढाल सिंह बिसेन होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टर के अलावा मूल रूप से किसान हैं.

सिवनी से चुने गए दूसरे राज्यपाल

सिवनी जिले से दूसरा मौका है, जब यहां के नेता को महामहिम तक की कुर्सी में पहुंचने का मौका मिला है. साल 2010 में सिवनी जिले के लखनादौन के घूरवाड़ा की रहने वाली कांग्रेस की वरिष्ठ नेता उर्मिला सिंह को भी हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया था. वह 2015 तक हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल रही थीं और 2018 में उनका निधन हो गया. फिलहाल उनके बेटे योगेंद्र सिंह बाबा लखनादौन से विधायक हैं. यह दूसरा मौका है जब सिवनी के नेता ढाल सिंह बिसेन को भी राज्यपाल की कुर्सी तक पहुंचने का मौका मिला है. ढाल सिंह को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के साथ केरल, ओडिशा, तमिलानाडु, कर्नाटक और सिक्कम के भी राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं.

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