उत्तराखंड में काम करेगा सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम, मानसून से पहले दो राज्यों को मिली मंजूरी
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पिछले महीने लॉन्च हुए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को NDMA ने कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से जून में अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था
देहरादून: भारत सरकार ने उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम पर लगी रोक हटा दी है. इससे अब मानसून और आपदा सीजन के दौरान लोगों तक कुछ ही सेकेंड में चेतावनी पहुंचाई जा सकेगी.
उत्तराखंड को सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम यूज करने की परमिशन मिली: मानसून की दस्तक से पहले उत्तराखंड के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. आपदा के दौरान कुछ ही सेकेंड में लोगों तक चेतावनी पहुंचाने वाले सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम पर लगी रोक उत्तराखंड के लिए हटा दी गई है. भारत सरकार ने आगामी मानसून सीजन और राज्य की आपदा संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर में इस प्रणाली के उपयोग की अनुमति दे दी है. ऐसे में अब किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में मौजूद लोगों के मोबाइल फोन पर तत्काल चेतावनी संदेश प्रसारित किए जा सकेंगे.
जून में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम पर रोक लगी थी: दरअसल, मई 2026 में देशभर में लॉन्च किए गए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से जून माह में अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था. उस समय मानसून की शुरुआत और चारधाम यात्रा के बीच इस फैसले को लेकर कई सवाल उठे थे, क्योंकि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और आपदा संभावित राज्य में समय पर चेतावनी मिलना जान-माल की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
उत्तराखंड का पुनर्विचार अनुरोध माना गया: उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि-
भारत सरकार ने कुछ तकनीकी कारणों की वजह से इस प्रणाली के उपयोग पर रोक लगाई थी. उत्तराखंड सरकार ने केंद्र के समक्ष यह पक्ष रखा कि जिन तकनीकी कारणों की समीक्षा की जा रही है, उनका राज्य में आपदा चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता से कोई सीधा संबंध नहीं है. साथ ही मानसून और चारधाम यात्रा के दौरान इसकी उपयोगिता को देखते हुए उत्तराखंड ने इस पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था. राज्य की जरूरतों और आपदा जोखिम को देखते हुए भारत सरकार ने उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए इस प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है.
-विनोद सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन-
संभावित खतरे से लोगों को बचाया जाएगा: सुमन ने कहा कि अब आगामी आपदा सीजन में आवश्यकता पड़ने पर इस प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में मौजूद लोगों तक तत्काल चेतावनी पहुंचाई जा सके.
क्या है सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम? सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम सामान्य एसएमएस सेवा से अलग एक लोकेशन आधारित चेतावनी प्रणाली है. इसमें किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर जानने की आवश्यकता नहीं होती. प्रशासन किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र को चिन्हित कर उस इलाके में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट संदेश प्रसारित कर सकता है.
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं: खास बात यह है कि यह प्रणाली इंटरनेट पर निर्भर नहीं होती और 2G, 3G, 4G तथा 5G नेटवर्क पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत इसकी त्वरित और लक्षित चेतावनी क्षमता है. यदि किसी क्षेत्र में बादल फटने, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, नदी का जलस्तर बढ़ने या अन्य किसी आपदा का खतरा हो, तो उसी क्षेत्र में मौजूद लोगों को कुछ ही सेकेंड में अलर्ट भेजा जा सकता है. अलर्ट मिलने पर मोबाइल फोन पर विशेष प्रकार की तेज ध्वनि के साथ फ्लैश संदेश दिखाई देता है, जो सामान्य नोटिफिकेशन की तरह आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
उत्तराखंड में अचानक बदलता है मौसम: उत्तराखंड के संदर्भ में इस तकनीक का महत्व और भी बढ़ जाता है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए राज्य पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे यात्रियों की होती है जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित नहीं होते. मौसम का अचानक बदलना, पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन, मलबा आने या नदियों का जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों में त्वरित चेतावनी कई लोगों की जान बचा सकती है. हालांकि भारत सरकार ने फिलहाल इसके उपयोग को लेकर कुछ प्रतिबंध भी निर्धारित किए हैं.
उत्तराखंड में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का प्रयोग वास्तविक आपातकालीन परिस्थिति में होगा: आपदा प्रबंधन सचिव विनोद सुमन ने बताया कि-
अब इस प्रणाली का नियमित अभ्यास या रूटीन टेस्टिंग नहीं की जाएगी. उत्तराखंड में इस तकनीक की टेस्टिंग लंबे समय से की जा चुकी है और राज्य इसके संचालन संबंधी प्रोटोकॉल से पूरी तरह परिचित है. इसलिए अब इसका उपयोग केवल वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में और सभी निर्धारित मानकों का पालन करते हुए ही किया जाएगा.
-विनोद सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन-
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण: मानसून की सक्रियता और चारधाम यात्रा के बीच सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम पर लगी रोक हटना उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि समय पर और सटीक चेतावनी किसी भी आपदा के प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है. ऐसे में इस तकनीक की वापसी राज्य की आपदा चेतावनी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.