दो हफ्ते बाद भी मिसिंग है MBA छात्रा बबीता पांडे, क्या सच में खतरनाक है उत्तराखंड का दयारा बुग्याल ट्रेक?
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नैनीताल जिले के रामनगर की बबीता पांडे 29 मई को लापता हुई थी, लोग सोशल मीडिया पर दयारा बुग्याल के बारे में जानना चाहते हैं
देहरादून: दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. दो सप्ताह बीतने को हैं और खोज अभियान जारी है. एसडीआरएफ, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की टीमें जंगलों, घाटियों, तालाबों और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में बबीता को तलाश कर रही हैं. अब हेलीकॉप्टर की मदद से भी क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दयारा बुग्याल ऐसा कैसा ट्रेक है, जहां से कोई व्यक्ति इस तरह गायब हो सकता है. ये सवाल भी लोग आज सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं, जिसका जवाब हमने खोजने की कोशिश की.
क्या है दयारा बुग्याल जिसे उत्तराखंड का स्वर्ग कहा जाता है? समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है. सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर और गर्मियों में दूर-दूर तक फैले हरे घास के मैदान इसे देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाते हैं. यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं. यही वजह है कि हर साल हजारों ट्रेकर इस क्षेत्र का रुख करते हैं.
घास के एक मैदान की बनावट पैदा करती है भ्रम: पहली नजर में दयारा बुग्याल किसी खुले मैदान जैसा दिखाई देता है. लेकिन अनुभवी पर्वतारोहियों के अनुसार इसकी भौगोलिक बनावट कई बार भ्रम पैदा कर सकती है. मौसम अचानक बदल जाना और फिर घना कोहरा छा जाना, जंगलों के भीतर कई अनौपचारिक पगडंडियों का होना और विशाल घास के मैदानों में दिशा भ्रमित हो जाना आम बात है. यदि कोई व्यक्ति मुख्य ट्रेक रूट से कुछ दूर भी भटक जाए, तो उसे वापस सही रास्ते तक पहुंचने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है.
दयारा बुग्याल तकनीकी रूप से उत्तराखंड के सबसे कठिन ट्रेकों में शामिल नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह आसान भी नहीं माना जा सकता है. खासकर ऐसे लोगों के लिए जो पहली बार पहाड़ों में ट्रेकिंग कर रहे हों. कई स्थानों पर गहरी ढलानें, घने जंगल और दूर-दूर तक फैला निर्जन क्षेत्र मौजूद है. ऐसे में यदि कोई व्यक्ति समूह से अलग हो जाए, तो उसकी तलाश करना बेहद मुश्किल हो जाता है. -चिराग, दयारा बुग्याल से ट्रेकिंग कर लौटे ट्रेकर-
ये बात सही है कि ये ट्रेक बहुत खूबसूरत और सुरक्षित है. मतलब किसी तरह का कोई अन्य कोई खतरा नहीं है. अब पहाड़, पानी और आग में अगर आप सावधानी नहीं रखेंगे, तो हर चीज आपको नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए हमें खुद ही सावधान रहना चाहिए. ये सुरक्षित और खूबसूरत है. इसीलिए इस ट्रेक पर हर साल हजारों लोग आते हैं.
-चिराग, दयारा बुग्याल से ट्रेकिंग कर लौटे ट्रेकर-
दो हफ्ते बाद भी नहीं मिला कोई सुराग: बबीता के खो जाने के बाद लगातार इस ट्रेक की चर्चा हो रही है. उधर बबीता पांडे के लापता होने के बाद प्रशासन ने व्यापक खोज अभियान शुरू किया है. एसडीआरएफ की टीमें लगातार क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. खोज अभियान अब जंगलों और ट्रेकिंग मार्गों से आगे बढ़कर उन जल स्रोतों तक भी पहुंच चुका है, जहां किसी दुर्घटना की आशंका हो सकती है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है, जिससे रहस्य और गहराता जा रहा है.
एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के अनुसार-
खोज अभियान हर संभव स्तर पर जारी है. टीमें लगातार विभिन्न दिशाओं में सर्च कर रही हैं. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौजूद तालाबों नदी-नालों और जल स्रोतों की भी जांच की जा रही है. गोताखोरों को भी उतारा गया है, जो पानी के भीतर जाकर तलाश कर रहे हैं. हालांकि अब तक किसी प्रकार का सुराग नहीं मिला है.
-अर्पण यदुवंशी, एसडीआरएफ कमांडेंट-
गांव में चर्चा और अटकलों का दौर: बबीता के लापता होने के मामले ने स्थानीय स्तर पर भी कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है. इस क्षेत्र के पूर्व प्रधान महेंद्र पोखरियाल का कहते हैं कि-
कुछ लोग हत्या कर शव को दफनाने जैसी आशंकाएं जता रहे हैं, लेकिन ऐसा करना आसान नहीं है. इसके लिए खुदाई और अन्य उपकरणों की आवश्यकता होती है. यदि बबीता कहीं गई है, तो वह अपने पैरों पर चलकर गई है. आज के समय में कई संभावनाएं हो सकती हैं, लेकिन जब तक वह नहीं मिल जाती, तब तक उन्हें जीवित मानकर ही खोज जारी रखनी चाहिए.
-महेंद्र पोखरियाल, पूर्व प्रधान-
ट्रेकिंग एजेंसी की लापरवाही आई सामने: इस मामले में जांच के दौरान ट्रेकिंग और कैंपिंग एजेंसी की लापरवाही भी सामने आई है. उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी के अनुसार एजेंसी ने ट्रेक पर गए लोगों का पंजीकरण सही तरीके से नहीं किया था. कुछ नामों में भी अनियमितताएं पाई गई हैं. इसे गंभीर चूक मानते हुए संबंधित एजेंसी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई भी की जा रही है.
सीसीटीवी, कॉल डिटेल और हर पहलू की जांच: उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है. टीम क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है. पुलिस किसी एक संभावना तक सीमित नहीं है और हर कोण से मामले की पड़ताल की जा रही है.
सवाल अब भी वही आखिर कहां गई बबीता? दो सप्ताह बीतने के बाद बबीता पांडे का कोई पता नहीं चल सका है. दयारा बुग्याल की खूबसूरती के पीछे छिपी भौगोलिक चुनौतियां ट्रेकिंग एजेंसी की कथित लापरवाही और अब तक न मिलने वाला कोई सुराग इस मामले को और रहस्यमय बना रहा है. हेलीकॉप्टर से लेकर गोताखोरों तक हर संसाधन लगाया जा चुका है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर बबीता पांडे कहां है?