केदारताल में लापता ट्रेकर्स का सर्च रेस्क्यू ऑपरेशन 6वें दिन भी जारी, लखनऊ की दो बहनें भी हैं लापता, कई चोटियां कर चुकी फतह
1 min readलखनऊ की वर्तिका और दीपिका भी केदारताल ट्रेक पर गए ट्रेकर्स दल के साथ थीं, उनके परिजन रेस्क्यू ऑपरेशन को बड़ी उम्मीद से देख रहे
उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी के केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन की चपेट में आकर लापता हुए ट्रेकर्स के लिए सर्च अभियान आज बुधवार 4 नवंबर को छठवें दिन भी जारी है. मंगलवार को 2 ट्रेकर्स के शव मिले थे. अभी बाकी 6 ट्रेकर्स की तलाश जारी है. लापता ट्रेकर्स में लखनऊ की दो बहनें भी शामिल हैं.
दो बहनों के ट्रेकिंग के जुनून ने परिवार की बढ़ाई चिंता: पहाड़ों की चोटियों को करीब से देखने और दुर्गम रास्तों को पार करने का जुनून लखनऊ की दो सगी बहनों के लिए अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता बन गया है. केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन के बाद लापता हुए आठ ट्रेकर्स में लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा भी शामिल हैं.
नेपाल तक ट्रेकिंग पर जाती थीं वर्तिका और दीपिका: दोनों बहनों को ट्रेकिंग का खासा शौक था. वो नेपाल से लेकर उत्तराखंड तक कई चुनौतीपूर्ण ट्रेक सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी थीं. उत्तरकाशी जिला मुख्याल उनकी तलाश और सुरक्षित वापसी की उम्मीद लेकर भाई अतुल वर्मा परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे. अतुल वर्मा ने बताया कि ट्रेकिंग पर जाने के बाद उनकी बहनों की ओर से कोई सूचना नहीं मिल पाई. ट्रेकिंग एजेंसी ने भी उन्हें घटना की जानकारी नहीं दी.
वर्तिका-दीपिका के भाई ने ट्रेकिंग एजेंसी पर लगाया लापरवाही का आरोप: अतुल ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से जब उन्हें केदारताल में हिमस्खलन और ट्रेकर्स के लापता होने की जानकारी मिली, तो परिवार की चिंता बढ़ गई. इसके बाद वह तत्काल परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंच गए. उन्होंने बताया कि उनकी बहन वर्तिका वर्मा फ्रीलांसर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जबकि दूसरी बहन दीपिका वर्मा एक निजी कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में वर्क फ्रॉम होम करती हैं. दोनों बहनों को घूमने और पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग करने का शौक था. इसी शौक के चलते उन्होंने देश और नेपाल के कई दुर्गम ट्रेक पर सफलतापूर्वक यात्रा की थी.
दो महीने पहले फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब गई थीं दोनों बहनें: अतुल के अनुसार, करीब दो माह पहले ही दोनों बहनें उत्तराखंड के फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करके लौटी थीं. इससे पहले करीब एक साल पूर्व अतुल ने अपनी दोनों बहनों और दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र स्थित केदारकांठा की ट्रेकिंग भी की थी. इसके अलावा दोनों बहनें नेपाल के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में भी ट्रेकिंग कर चुकी थीं.
उत्तरकाशी से लखनऊ तक चिंता का माहौल: अतुल ने बताया कि दोनों बहनें ट्रेकिंग के दौरान जरूरी उपकरणों और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती थीं. उनके पास ट्रेकिंग से संबंधित आवश्यक सामान भी रहता था. परिवार को उम्मीद है कि दोनों बहनें सुरक्षित होंगी और जल्द ही उन्हें सकुशल वापस लाया जाएगा. उत्तरकाशी पहुंचने के बाद से ही परिजन राहत एवं बचाव अभियान से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं. दोनों बहनों के लापता होने से लखनऊ स्थित उनके परिवार और परिचितों में चिंता का माहौल है.
27 अक्टूबर को ट्रेकिंग पर गया था 13 सदस्यीय दल: बीती 27 अक्टूबर को उत्तरकाशी के गंगोत्री से 7 ट्रेकर्स और 6 सपोर्टिंग स्टाफ समेत कुल 13 सदस्यीय दल केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था. इसमें 1 कुक अगले ही दिन गंगोत्री लौट आया था. दल के अन्य सदस्यों को 29 अक्टूबर तक लौटना था, लेकिन मौसम खराब और फंसने के कारण दल समय तक नहीं पहुंच पाया था.
मंगलवार को 2 शव मिले थे: इसके बाद से रेस्क्यू अभियान जारी था. लापता लोगों में पश्चिम बंगाल के पांच ट्रेकर्स तपस बाउरी (30), रतन घोष (23), मनोज खोवास (39), रिंटू मंडल (40), उदय घोष (30), उत्तर प्रदेश की दो महिला ट्रेकर्स वर्तिका वर्मा (28), दीपिका वर्मा (29) और उत्तरकाशी का स्थानीय गाइड 25 वर्षीय सिद्धार्थ राणा शामिल है. मंगलवार को रेस्क्यू टीम को दो शव मिले थे. जो शव मिले हैं, वो कौन हैं, इसकी पुलिस ने अभी तक पुष्टि नहीं की है.
