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October 22, 2026

चारधाम में श्रद्धालुओं के साथ ‘मौतों’ ने भी बनाया रिकॉर्ड, क्या मेडिकल एजवाइजरी को साइडलाइन करना पड़ रहा भारी?

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उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 में अभी तक 60 लाख श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड बन चुका है. लेकिन मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर तमाम इंतजामों और दावों के बावजूद मौतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है. यात्रा की तैयारियों के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, मेडिकल स्क्रीनिंग चिकित्सा इकाइयों की तैनाती और श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद इस साल अब तक चारों धामों में 271 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है.

चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत 19 अप्रैल से हुई थी. शुरुआत में चारों धामों में श्रद्धालुओं के पहुंचने की रफ्तार धीमी रही, लेकिन धीरे-धीरे यात्रा ने रफ्तार पकड़ी और बुधवार 21 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक आंकड़ा 60 लाख के पार हो चुका है. चारधाम यात्रा के इतिहास में ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. लेकिन चिंता की बात है कि श्रद्धालुओं के बढ़ते आंकड़े के साथ ही श्रद्धालुओं की मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. 19 अप्रैल से 21 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक चारों धामों में 271 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. खास बात है कि इसमें धामों के मार्गों पर हादसों में जान गंवाने वाले श्रद्धालु शामिल नहीं हैं.

केदारनाथ में सबसे ज्यादा मौतें, बदरीनाथ दूसरे नंबर पर: चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत के सामने आए धामवार आंकड़ों में केदारनाथ सबसे ऊपर है. 22 अप्रैल से 21 अक्टूबर तक सुबह 10 बजे तक यहां 132 श्रद्धालुओं की मौत हुई है. जबकि 23 अप्रैल से 21 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक बदरीनाथ में 85 लोगों की जान गई है. इसी तरह यमुनोत्री में 34 और गंगोत्री में 20 श्रद्धालुओं की मौत हुई है. ऐसे में चारों धामों के आंकड़ों को देखें तो ये संख्या 271 पहुंचती है. केदारनाथ और बदरीनाथ में श्रद्धालुओं के मौतों की संख्या स्वास्थ्य विभाग और यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के लिए विशेष चुनौती बनी हुई है.

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनती हैं जानलेवा: हिमालयी क्षेत्र में चारों धामों की यात्रा सामान्य पर्यटन से अलग है. श्रद्धालुओं को कम समय में अधिक ऊंचाई पर पहुंचना पड़ता है. जहां ऑक्सीजन का दबाव कम होने के कारण मौसम में भी तेजी से बदलाव होता है. पैदल चढ़ाई, शारीरिक थकान, ठंड और पहले से मौजूद बीमारियां शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है. विशेष रूप से हृदय रोग, सांस संबंधी बीमारी, उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित लोगों को यात्रा के दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है. ऊंचाई से जुड़ी बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करना भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

ऐसे में केवल यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी जारी करना पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं की स्थिति पर नजर रखी जाए. गंभीर लक्षण सामने आने पर तत्काल उपचार मिले और जरूरत पड़ने पर मरीज को कम ऊंचाई वाले अस्पताल तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था हो. हालांकि देखा जाए तो समय-समय पर कई भक्तों को एसडीआएफ और अन्य सुरक्षा बल भी बचाने में कामयाब रहे हैं.

हर साल की तैयारी, फिर भी नहीं रुक रहीं मौतें: बदरीनाथ पुजारी समुदाय से जुड़े आशुतोष कहते हैं, चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले संबंधित विभाग स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सा केंद्रों, स्क्रीनिंग और आपातकालीन सहायता की व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां करते हैं. श्रद्धालुओं को अपनी सेहत का ध्यान रखने, पर्याप्त आराम करने और गंभीर बीमारियों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेने के लिए भी कहा जाता है. इसके बावजूद मौतों की संख्या को देखते हुए यह समीक्षा जरूरी हो जाती है कि इन व्यवस्थाओं का लाभ जरूरतमंद श्रद्धालुओं तक कितनी तेजी से पहुंच पा रहा है. क्या गंभीर लक्षणों की पहचान समय पर हो रही है? क्या दुर्गम स्थानों पर पर्याप्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध है? क्या आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में देरी तो नहीं होती? इन सवालों को भी देखना होगा.

बीते कुछ सालों में बदरीनाथ-केदारनाथ समेत सभी पहाड़ी इलाकों में डाक्टर और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर हुई हैं. लेकिन उसके बाद भी हर साल ये संख्या बढ़ रही है. ये चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए.
-आशुतोष, पुजारी, बदरीनाथ-

पिछले वर्षों के आंकड़े भी दे रहे चेतावनी: चारधाम यात्रा के दौरान मौतों का मामला केवल इस साल तक सीमित नहीं है. साल 2022 में 311 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई थी. 2023 में चारधाम में 245 मौतों हुई थी. जबकि 2024 में 246 मौतों हुई थी. साल 2025 में 218 मौतें राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में दर्ज है. अब इस साल चारों धामों में 271 मौतों का आंकड़ा सामने आने से एक बार फिर स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

सरकार की प्राथमिकता: उत्तराखंड सरकार की ओर से चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही जाती रही है. मुख्यमंत्री धामी ने चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. यात्रा मार्गों और संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी और किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया था. लेकिन मौतों के मौजूदा आंकड़ों बताते है कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने की व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी साबित हो रही है.

चारधाम में हमारी तरफ से लगातार व्यवस्था बेहतर की गई है. केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धामों में अस्पताल तक चल रहे हैं. जिनकी मौत हो रही है या हुई है, उनमें सबसे अधिक ह्रदय रोग वाले श्रद्धालु है. हम लगातार लोगों से अपील करते हैं कि वो अपना चेकअप करवाकर जाएं. हमारी टीम लगातार अलग-अलग पॉइंट पर तैनात है. लेकिन कई लोग खुद से लापरवाही कर रहे हैं. हमने साल दर साल व्यवस्थाओं को बेहतर किया है. राज्य सरकार ने इस बार मृतकों के लिए मुआवजा देने का भी प्रवधान किया है. इसके साथ ही, मुख्यमंत्री राहत कोष https://cmrf.uk.gov.in/ और उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://usdma.uk.gov.in/ में जाकर भी धाम की ओर से सहयता से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं.
-विनय शंकर पांडे, सचिव, स्वास्थ्य विभाग-

जवाबदेही जरूरी: चारधाम यात्रा, उत्तराखंड की धार्मिक सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में यात्रा का सफल प्रबंधन केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने या दर्शन की व्यवस्थाएं सुचारु रहने से नहीं आंका जा सकता. श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

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