पीएम ‘सोना’ अपील: देहरादून में कम होने के बजाय बढ़ी गोल्ड खरीद, असमंजस में ग्राहक, भविष्य में दाम बढ़ने की आशंका
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देहरादून के सर्राफा बाजार में प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई. रिपोर्ट- धीरज सजवाण
देहरादून: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए देशवासियों से पेट्रोल डीजल की खपत कम करने, एलपीजी गैस, खाने के तेल को इस्तेमाल में कम लाने, अगले एक साल तक विदेशी यात्रा से बचने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है. इस अपील के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है. कई लोग इसे एक भविष्य में आने वाले संकट के रूप में देख रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा लोगों में सोने की खरीद को लेकर हो रही है. ऐसे में पीएम मोदी की अपील का असर क्या रहा? यह जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम ने देहरादून के प्रमुख सर्राफा बाजारों का रुख़ किया.
राजधानी देहरादून का धामावाला, पलटन बाजार और कुछ अन्य इलाके आभूषण की दुकानों को लेकर प्रचलित है. ईटीवी भारत की टीम ने इन इलाकों के ज्वेलरी शॉप में जाकर ग्राहकों और व्यापारियों से पीएम मोदी की अपील के संबंध में बातचीत की. सामने आया कि प्रधानमंत्री की अपील को लोग सीधे तौर पर खरीददारी रोकने वाले संदेश के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि इसे आने वाले समय में सोने की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत के रूप में समझ रहे हैं. यही वजह है कि कई लोगों के मन में असमंजस और जल्द खरीददारी की सोच दोनों एक साथ देखने को मिली.
PM मोदी की अपील से डरे ग्राहक: धामावाला क्षेत्र में सोने की खरीदारी कर रही ग्राहक मान्या ने बताया कि, ‘अगले साल मेरी शादी है और शादी जैसे बड़े पारिवारिक आयोजन में सोने की जरूरत को टाला नहीं जा सकता. अगर अभी खरीददारी नहीं करेंगे तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती है. मौजूदा वैश्विक हालात और बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए कोई यह नहीं कह सकता कि सोना कितना महंगा होगा?’
प्रधानमंत्री की अपील अपनी जगह है, लेकिन जिन परिवारों ने पहले से शादी या अन्य कार्यक्रम तय कर रखे हैं, उनके लिए खरीददारी टालना संभव नहीं है. लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखे बिना ऐसी अपील करना कई परिवारों के लिए उलझन पैदा कर सकता है.
– मान्या, ग्राहक –एक अन्य ग्राहक मोहिनी ने बताया कि, सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना गया है. भारतीय परिवार आर्थिक संकट या अनिश्चितता के दौर में सोने को सबसे भरोसेमंद विकल्प मानते हैं.
प्रधानमंत्री की अपील सुनने के बाद उनके मन में पहला विचार यही आया कि शायद भविष्य में सोने के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं. जब सरकार इस तरह का संदेश देती है, तो आम लोग उसे आने वाले आर्थिक बदलाव से जोड़कर देखते हैं. इसी कारण कई लोग खरीददारी टालने के बजाय जल्द खरीदने की योजना बना रहे हैं.
– मोहिनी, ग्राहक –व्यापारियों में सरकार के प्रति आक्रोश: व्यापारियों की प्रतिक्रिया भी लगभग इसी दिशा में रही. देहरादून सर्राफा मंडल के अध्यक्ष सुनील मेसन का मानना है कि, भारत में सोना केवल एक धातु या निवेश नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है. हर परिवार की भावनाएं सोने से जुड़ी होती हैं. विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और पारिवारिक परंपराओं में सोने की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में इस तरह की अपील करते समय उसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर विचार जरूरी था. उन्होंने कहा कि व्यापारिक दृष्टि से यह बयान बैकफायर भी कर सकता है.
बाजार में जब किसी वस्तु को लेकर भविष्य की अनिश्चितता पैदा होती है, तो अक्सर उसकी मांग बढ़ जाती है. निवेशक और आम ग्राहक दोनों इस तरह के बयानों को संकेत के रूप में लेते हैं. यदि लोगों को लगे कि आगे कीमत बढ़ेगी या आयात पर असर पड़ेगा, तो वे खरीददारी बढ़ा देते हैं. सोना और चांदी जैसे सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देते हैं.
ऐसे में एक बयान पूरे व्यापार तंत्र पर असर डाल सकता है. व्यापार देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और ट्रेड डेफिसिट जैसे मुद्दों के समाधान के लिए अन्य आर्थिक उपायों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.
– सुनील मेसन, अध्यक्ष, देहरादून सर्राफा मंडल –दाम कितना भी हो, जिसे खरीदना है वो खरीदता ही है: धामावाला बाजार के व्यापारी आकाश भी इस बात के इत्तेफाक रखते हैं कि ग्राहक सोना नहीं छोड़ेंगे. आकाश बताते हैं कि फिलहाल बाजार में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नहीं दिखे. अभी शादी का मुख्य सीजन नहीं है, इसलिए सामान्य तौर पर भी खरीदारी सीमित रहती है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री की अपील के बाद ग्राहक दुकानों पर आकर एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सोना आगे और महंगा होगा. आकाश ने आगे कहा कि,
बाजार की प्रवृत्ति यह रही है कि लोग जरूरत और मौके पर खरीदते ही हैं. उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थीं, तब भी खरीदारी में बड़ी कमी नहीं आई थी. अभी वास्तविक असर आने वाले कुछ सप्ताह में स्पष्ट होगा.
– आकाश, सर्राफा व्यापारी –ज्वेलरी व्यापारी अभिषेक कक्कड़ ने बताया कि, प्रधानमंत्री की अपील के तुरंत बाद बाजार में खरीददारी पर कोई सीधा असर नहीं दिखा. इस समय वैश्विक परिस्थितियां, खासकर गल्फ क्षेत्र में तनाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव, सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं.
हाल के कारोबारी सत्र में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से महंगा हुआ है. ग्राहक इन वैश्विक परिस्थितियों को भी प्रधानमंत्री के बयान से जोड़कर देख रहे हैं. इससे भ्रम बढ़ा है, लेकिन खरीददारी बंद नहीं हुई है. जो व्यक्ति जरूरत के लिए खरीदना चाहता है, वह अपील के बावजूद खरीददारी करेगा.
– अभिषेक, सर्राफा व्यापारी –ग्राहकों में बढ़ी सोना खरीदने की बेचैनी: व्यापारी हर्ष रस्तोगी का कहना है कि, प्रधानमंत्री के बयान से लोगों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति जरूर बनी है. ग्राहक लगातार पूछ रहे हैं कि क्या भविष्य में सोने की उपलब्धता घटेगी या कीमतें अचानक बढ़ जाएंगी? उनका कहना है कि इस प्रकार की आशंका से बाजार में मांग बढ़ सकती है. फिलहाल व्यापारियों को नुकसान जैसा कुछ नहीं दिख रहा, लेकिन आम ग्राहक असमंजस में हैं. कई लोग यह सोचकर जल्दी खरीदारी कर रहे हैं कि बाद में महंगा न हो जाए.
व्यापारी वीरपाल सिंह ने भी कहा कि, सर्राफा कारोबार पर फिलहाल कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि आज भी बाजार में सामान्य कारोबार हुआ और ग्राहकों की आवाजाही बनी रही. वीरपाल का कहना है कि सोना भारतीय परिवारों के लिए जरूरत का हिस्सा है. इसे केवल निवेश नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के रूप में भी देखा जाता है. ऐसे में किसी अपील से लोगों की खरीदारी की आदत तुरंत नहीं बदलती.
ग्राहकों के मन में कई सवाल: देहरादून के बाजार से सामने आई तस्वीर साफ करती है कि प्रधानमंत्री की अपील बाजार में मंदी नहीं लाई. उल्टा इसने लोगों के मन में सोने की कीमतों और भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कई ग्राहक इसे संकेत मान रहे हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है. यही कारण है कि कुछ लोगों ने अभी खरीदारी करना अधिक सुरक्षित समझा.
कुल मिलाकर देहरादून के सर्राफा बाजार में फिलहाल प्रधानमंत्री की अपील का असर व्यवहारिक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक नजर आ रहा है. खरीददारी बंद नहीं हुई, लेकिन चर्चाएं तेज हो गई हैं. व्यापारियों का मानना है कि यदि लोगों में भविष्य को लेकर आशंका और बढ़ी, तो यह अपील बाजार के लिए उल्टा असर भी ला सकती है. आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि प्रधानमंत्री की यह अपील वास्तव में बाजार को प्रभावित करती है या सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाती है.
